क्या है जल्लीकट्टू का इतिहास और विवाद | What is Jallikattu History and ban issue in hindi

क्या है जल्लीकट्टू का इतिहास और विवाद |

तो दोस्तों आप सभी यह तो जानते ही हैं की कई जगहों पर बहुत से अजीब अजीब खेल खेले जाते थे और उन सभी खेलों को काफी पुराने समय से खेला जाता था। जिनमे से एक हैं जल्लीकट्टू। इस खेल को भारत के एक राज्य तमिलनाडु में आज भी खेला जाता था और इस खेल को पोंगल के त्यौहार वाले दिन खेला जाता था। यह खेल तमिल के लोगो का सांस्कृतिक खेल भी माना जाता हैं। लेकिन कुछ समय के पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस खेल पर प्रतिबन्ध लगा दिए गए थे। तो क्या आप जल्लीकट्टू (Jallikattu) के बारे में जानते हैं अगर नहीं तो आपको चिंता करने की कोई भी आवश्यकता नहीं हैं क्योंकि आज हम आपको इसलेख के मदद से जल्लीकट्टू के बारे में बहुत सी आवश्यक जानकारी के बारे में बताने वाले हैं जैसे की – जल्लीकट्टू क्या है? जल्लीकट्टू का इतिहास और विवाद क्या है आदि जैसी जानकरी

क्या है जल्लीकट्टू का इतिहास और विवाद |
जल्लीकट्टू का इतिहास

तो अगर आप भी जल्लीकट्टू के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हो तो उसके लिए आपको हमारे इस लेख को पूर्ण रूप से पढ़ना होगा तब ही आप इससे सम्बंधित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे

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क्या है जल्लीकट्टू ?

जल्लीकट्टू एक प्रकार का खेल हैं जिसको तमिलनाडु के लोगो के द्वारा खेला जाता हैं। यह खेल तमिलनाडु का परंपरागत खेल भी माना जाता हैं। इस खेल को तमिलनाडु के लोगो के द्वारा उनके खास त्यौहार यानि के पोंगल त्यौहार के समय खेला जाता हैं। यह खेल करीब 2000 साल पुराना माना जाता हैं। इस खेल में बैल के सिंगों पर पैसे या फिर सिक्कें फसाये जाते हैं और फिर जो व्यक्ति उन पैसों या सिक्कों को बैल के सींग से निकाल लेता उसको इस खेल का विजेता माना जाता हैं और उसको इनाम भी दिया जाता हैं। इस खेल के दौरान व्यक्ति को बैल को नियंत्रित भी करना पड़ता हैं।

इस खेल में मंदिरों के बैलों को लिया जाता हैं क्योंकि उनको सभी मवेशियों का मुखिया माना जाता हैं। बैलों को आपस में लड़वाने के लिए उनको भड़काया जाता हैं और लोग उनको भड़काने के लिए बहुत कुछ करते हैं जैसे की – बैलों की पूँछ को मोड़ते हैं, उनकी आँखों में मिर्च डालते हैं और केवल यह ही नहीं बल्कि बैलों को शराब भी पिलाई जाती हैं। इस खेल में जो बैल आसानी से पकड़ा जाता हैं उसको कमजोर माना जाता हैं और उन बैलों को काम के लिए इस्तेमाल किया जाता हैं और जो बैल जल्दी से पकड़ में नहीं आता है उस बैल को ताकतवर माना जाता हैं और उसको नस्ल बढ़ाने के लिए रखा जाता हैं।

जल्लीकट्टू का इतिहास

जल्लीकट्टू खेल को तमिलनाडु राज्य का परंपरागत खेल माना जाता हैं। यह खेल करीब 2000 वर्ष पुराना माना जाता हैं। जल्लीकट्टू नाम दो शब्दों से मिलकर बना हैं जल्ली और कट्टू इसमें जल्ली का मतलब हैं सिक्कों की थैली और कट्टू का मतलब हैं बैल के सींग। पूर्व समय में बड़े बड़े योद्धा अपनी ताकत दिखाने के लिए इस खेल का सहारा लिया करते थे। माना यह भी जाता हैं की इस खेल को पहले के समय में स्वयंवर की तरह इसको उपयोग किया जाता था। क्योंकि इसमें ताकतवर व्यक्ति ही बैल को नियंत्रित कर पाते थे और जो व्यक्ति बैल को नियंत्रित कर लेता वह सबसे ताकतवर साबित होता और उसका विवाह उस लड़की के साथ हो जाता जिसका स्वयंवर हो रहा हो।

Jallikattu पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया

Jallikattu पर प्रतिबंध भी लगाया गया जिसके बहुत से कारण हैं। इस खेल को लेके बहुत से लोगो का यह मानना हैं की इस खेल को बंद कर देना चाहिए क्योंकि इस खेल के दौरान बहुत से लोगो की मौत की दुर्घटनाओं के किस्से भी सामने आये थे। इस खेल को बंद करने के लिए पशु कल्याण विभाग द्वारा इस खेल को लेकर आपत्ति जताई जा रही थी क्योंकि इस खेल के दौरान लोग बैल को भड़काने के लिए उनकी आंखों में मिर्च पाउडर डालते थे और उनकी पूँछ को मरोड़ा भी जाता था और कभी कभी तो उनको शराब भी पिलाई जाती थी। इसलिए बहुत से लोगो के द्वारा इस खेल का विरोध किया जा रहा था

सन 2006 में इस खेल को बंद करने के लिए मद्रास के हाई कोर्ट में याचिका भी दाखिल करवाई गयी थी। उसके बाद 2009 में इस खेल को लेकर बहुत से नए नियम बना दिए गए थे जिसमे वीडियोग्राफी और लोगो की सुरक्षा के लिए वहां पर डॉक्टरों का होना आवश्यक हैं और वहाँ पर विशेषज्ञ का होना भी अनिवार्य हैं ताई लोगो की सुरक्षा भी बनी रहे।

इन नियमों को बनाने के बाद इस खेल के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं में काफी हद तक सुधार भी आया। लेकिन पशु कल्याण कार्यकर्ताओं के द्वारा इस खेल को पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही थी। फिर यह केस मद्रास हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। उसके बाद सं 2011 में बैल को उन जानवरों की केटेगरी से निकाल दिया गया जिनको मनोरंजन के तौर पे इस्तेमाल किया जाता हैं।

उसके बाद इस खेल के समर्थकों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी गयी फिर उसके बाद 2014 में इस खेल को ऊपर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया था। उसके बाद 2015 में इस खेल का आयोजन नहीं किया गया था। लेकिन उसके बाद लोग इस खेल को लेकर लोग काफी लोग जो इस खेल के समर्थक थे वह सभी इस खेल को खेलने के लिए मांग करने लगे और उन सभी ने इस खेल के लिए प्रदर्शन करने लगे और फिर लोग हिंसा पर भी उतर आये थे। इस खेल के समर्थकों ने मरीना बीच पर और तमिल नाडु के बहुत सी जगहों पर प्रदर्शन करने लगे थे और फिर सरकार द्वारा उन सभी प्रदर्शनों को रोकने के लिए आदेश दिए गए थे।

जल्लीकट्टू से सम्बंधित कुछ प्रश्न और उनके उत्तर

जल्लीकट्टू क्या हैं ?

जल्लीकट्टू एक प्रकार का खेल हैं जिसको तमिल नाडु के लोगो के द्वारा खेला जाता हैं। यह खेल तमिल नाडु का परंपरागत खेल भी माना जाता हैं। इस खेल को तमिलनाडु के लोगो के द्वारा उनके खास त्यौहार यानि के पोंगल त्यौहार के समय खेला जाता हैं।

जल्लीकट्टू खेल में क्या होता हैं ?

इस खेल में बैल के सिंगों पर पैसे या फिर सिक्कें फसाये जाते हैं और फिर जो व्यक्ति उन पैसों या सिक्कों को बैल के सींग से निकाल लेता उसको इस खेल का विजेता माना जाता हैं और उसको इनाम भी दिया जाता हैं। इस खेल के दौरान व्यक्ति को बैल को नियंत्रित भी करना पड़ता हैं।

Jallikattu खेल कितने साल पुराना माना जाता हैं ?

Jallikattu खेल करीब 2000 साल पुराना माना जाता है

Jallikattu खेल पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया ?

Jallikattu खेल पर प्रतिबंध इसलिए लगाया गया क्योंकि इस खेल के चलते बहुत से लोगो की मौत की दुर्घटनाये भी सामने आयी हैं और इस खेल में जानवरों को बहुत सी पीड़ा दी जाती थी जैसे की – बैल को भड़काने के लिए उसकी पूँछ को मरोड़ा जाता था और उसकी आँखों में मिर्ची पाउडर भी डाला जाता था और कई बार तो बैल को शराब पिलाई जाती थी।

Jallikattu पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा कब प्रतिबन्ध लगाया गया ?

Jallikattu पर 2014 में पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया गया।

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