भारत में बैंकिंग प्रणाली का इतिहास व प्रकार | Banking System Type and history in India in hindi

भारत में बैंकिंग प्रणाली का इतिहास व प्रकार

भारत में बैंकिंग प्रणाली का इतिहास:- आप सभी यह तो जानते ही हैं की हमारे इस जीवन में बैंक एक एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा बन चूका हैं। आज के समय में हर किसी व्यक्ति को बैंकिंग क बहुत आवश्यकता होती हैं। बैंकों द्वारा हम सभी को बहुत सी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं जिसकी हम सभी को बहुत सी आवश्यकताएं होती हैं। बैंक भी हमारे देश की आर्थिक व्यवस्था का ही एक हिस्सा हैं और बिना बैंकों के किसी भी देश की अर्थव्यवस्था विकसित नहीं हो सकती हैं। अगर देखा जाये तो देश की Banking System ही देश की अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा हैं। पुराने समय की Banking System और आज की बैंकिंग प्रणाली में बहुत ही अंतर् हैं।

भारत में बैंकिंग प्रणाली का इतिहास व प्रकार
भारत में बैंकिंग प्रणाली का इतिहास जाने

तो क्या आप बैंकिंग प्रणाली का इतिहास जानते हैं अगर नहीं तो आप बिलकुल निश्चिंत हो जाइये क्योंकि आज हम आपको इस लेख के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली की बहुत सी आवश्यक जानकारी देने वाला हु जैसे की भारत में बैंकिंग प्रणाली का इतिहास और Banking System के प्रकार आदि जैसी बहुत सी जानकारी तो दोस्तों अगर आप भी इस प्रकार की जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो उसके लिए आपको हमारे इस लेख को अंत तक ध्यानपूर्वक पढ़े ताकि आप लोग भी इससे सम्बंधित बहुत सी जरुरी जानकारी प्राप्त कर सकें

इसपर भी गौर करें :- बैंक अकाउंट कैसे खोलते है

बैंकिंग प्रणाली क्या हैं ?

बैंकिंग प्रणाली बहुत से बैंकों का समूह होता हैं जो की लोगो को वित्तीय सहायता प्रदान करता हैं और जो भी सुविधाएं हमको बैंकों के द्वारा प्रदान की जाती हैं उसको बैंकिंग प्रणाली कहते हैं। Banking System का उद्देश्य अर्थव्यस्था में सुरक्षा व सुरक्षा प्रदान करना हैं। Banking System आज के समय में बहुत ही आवश्यकता हैं। बैंक जब किसी भी व्यक्ति को बहुत सी सुविधाएं प्रदान करती हैं उन्ही सुविधाओं को banking system भी कहा जाता हैं। भारत में ऐसे बहुत से बैंक हैं जो की हमें बैंकिंग प्रणाली की सुविधा प्रदान करते हैं जैसे की – केंद्रीय बैंक, वाणिज्यिक बैंक, इंटरनेट बैंक, निवेश बैंक, बचत और ऋण संघ, बीमा कंपनियां और क्रेडिट यूनियन।

भारत में बैंकिंग प्रणाली का इतिहास

तो दोस्तों आज हम आपको यहाँ पर बैंकिंग प्रणाली के इतिहास के बारे में बहुत सी जानकारी बताने वाले हैं तो कृपया करके उसको ध्यान से पढ़े

भारत के प्राचीन काल में बैंकिंग प्रणाली

भारत के प्राचीन काल में भी बैंकिंग प्रणाली का उपयोग किया जाता था जिसके कुछ तथ्य के बारे में हम आपको यहाँ पर बताने वाले हैं तो कृपया कर ध्यान से पढ़े

  • पुराने समय जिस समय में सभयता ऊंचाइयों पर थी तो उस समय में सभी जगहों पर धन और ऐश्वर्य था तो उस समय लोगो को अपने धन संभालने के लिए किसी जगह की आवश्यकता था तो उस समय बैंक का निर्माण किया गया और तब लोगो ने अपने धन को बैंक में जमा करना शुरू किया।
  • वेदों में एक पद का जिक्र किया गया हैं जिस पद का नाम हैं कुसीदिन। पुराने समय में कुसीदिन पैसों को संभाला करते थे इसके बारे में उल्लेख सूत्रों और जातको तक मिलता हैं।
  • इन सभी बातों यह पता चलता हैं की इस प्रकार से धन का प्रबंधक इस तरह से 2000 ईसा पूर्व से लेकर 400 ईसा पूर्व तक लगभग 1600 सालों लोगो के बीच इस प्रकार का लेन देन चलता रहा।
  • जैसा की आपको पता ही हैं की उधार देना यह फिर ज़मीन किराये पर देना पुराने समय से चलता आ रहा हैं और उस समय उधार देते वक़्त जिस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करवाएं जाते हैं उसको पुराने समय में ऋण पत्र या ऋण पन्ने के नाम से जाना जाता था।
  • कौटिल्य ने भी इन सभी चीजों का जिक्र अपनी किताबों में किया हुआ हैं और उस समय उसको ऋण पत्र को ऋण के नाम से जानते थे।
  • जिस समय चंद्र गुप्त मौर्या का कार्यकाल चल रहा था उस समय तक सत्ता बैंकिंग का प्रयोग करने लगी थी जिसके बारे में बहुत से उल्लेख में बताया गया हैं। उल्लेखों में यह बताया गया हैं की उस समय राज्य एक वादा पत्र जारी करती थी जिसमे पैसे चुकाने का वादा किया जाता था।
  • बाद में इन सभी प्रथाओं को बहुत से व्यापारियों द्वारा अपना लिया गया था और 185 AD आते आते वादा पत्र भी प्रचलन में आ चुके थे।

भारत के मध्य काल में बैंकिंग प्रणाली

भारत के मध्य काल में भी बैंकिंग प्रणाली का प्रयोग किया जाता था जिसके कुछ तथ्यों के बारे में हम आपको यहाँ पर बताने वाले हैं तो कृपया ध्यान से पढ़े

  • जैसा की हमने आपको बताय था की मौर्य काल तक वादा पत्र जिसको ऋण पत्र भी कहते हैं का प्रचलन शुरू हो चूका था और यह प्रचलन तब से लेकर मुग़लों के समय तक चलता रहा। मुग़लों के समय भी इसका उपयोग किया जाता था।
  • मुग़ल काल में भी ऋण पत्रों का उल्लेख मिला हैं मुग़ल काल में दो प्रकार के ऋण पत्रों का जिक्र किया गया हैं जिसमे पहला हैं दस्तावेज ए इन्दुतलाब इसको किसी की मांग पर जारी किया जाता था। दूसरे का नाम दस्तावेज ए मियादी इसको एक निश्चित समय के बाद ही नकद में परिवर्तित किया जा सकता था। इसको मुग़लों के समय का फिक्स डिपाजिट कहा जाता था।
  • इन सभी प्रकार के दस्तावेजों को शाही खजाने से जारी किया जाता था और उस समय में इसके जैसी ही एक और चीज आ चुकी थी जिसको महाजनी के नाम से जाना जाता था।
  • महाजनी में कोई व्यक्ति लोगों को पैसे उधार में देता था और उसके बड़े में वह व्यक्ति अपनी मर्जी का सूद लोगो से वसूलता था। उस समय में लोगो ने एक चीज का प्रयोग शुरू जिसको हुंडी भी कहते थे। हुंडी को पुराने समय का क्रेडिट कार्ड भी बोल सकते हो।

भारत के आधुनिक काल में बैंकिंग प्रणाली

भारत के आधुनिक कल में भी बैंकिंग प्रणाली का प्रयोग किया जाता था और उसमे बहुत से सुधर और बदलाव भी आये थे जिसके कुछ तथ्यों के बारे में हम आपको यहाँ पर बताने वाले हैं तो कृपया कर ध्यान से पढ़े।

  • भारत में आधुनिक बैंकिंग का प्रारम्भ आधुनिक काल से माना जा सकता हैं जब भारत में विदेशी व्यापाइयों का आना शुरू हुआ था यह करीब 200 वर्ष पहले की बात हैं। उस समय में अंग्रेज और फ्रांस के लोग भारत में व्यापर करने के लिए आये थे।
  • उनमे से अंग्रेजों ने भारत में ही अपने पैर जमा लिए थे और उन्होंने ईस्ट इंडिया नाम की कंपनी की शुरुआत करि और उस कंपनी से इनको आय मिलने लगी और यह पैसे कमाने लगे और उन पैसों को सँभालने के लिए अंग्रेजों को बैंक की आवश्यकता पढ़ी।
  • उसके बाद अंग्रेजों ने भारत में बैंक की शुरुआत की क्योंकि अंग्रेजों का प्रभाव सबसे पहले बंगाल की ओर पढ़ा था तो इन्होने सबसे बंगाल में ही अपने बैंक का निर्माण 1809 में किया और फिर इन्होने उस बैंक का नाम बैंक ऑफ़ बंगाल रखा।
  • उसके बाद अंग्रेजों का प्रभाव बॉम्बे की ओर पढ़ा तो फिर दूसरे बैंक का निर्माण इन्होने 1840 में किया और इन्होने उसका नाम बैंक ऑफ़ बॉम्बे
  • उसके बाद इन्होने अपने तीसरे बैंक की स्थापना 1843 में मद्रास में की और इन्होने उसका नामा बैंक ऑफ़ मद्रास रखा। उसके बाद सन 1857 में जब पहली क्रांति आयी तब ईस्ट इंडिया कंपनी को बंद कर दिया गया और अंग्रेजों का शाशन ब्रिटैन की महारानी के पास आ गया और इन तीनों बैंकों आपस में जोड़ दिया गया और उस बैंक को इन्होने इंपीरियल बैंक का नाम दिया।
  • उसके बाद जब भारत आजाद हो गया 1955 में इंपीरियल बैंक को परिवर्तित करके इस बैंक का नाम स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया रख दिया गया।

आजादी के बाद भारत में बैंकिंग प्रणाली

आजादी के बाद भी भारत की बैंकिंग प्रणाली में बहुत से बदलाव लाये गए जिसके बारे में हम आपको यहाँ पर बताने वाले हैं तो अगर आप भी इसके बारे में जानना चाहते हैं तो कृपया इसको पूरा पढ़े

  • हमारे देश को सभी बैंकिंग संस्थाओं को मैनेज करने की और भारतीय मुद्रा को संभालने की आवश्यकता भी पढ़ी तब जाकर सन 1949 में फिर भारतीय रिज़र्व बैंक का राष्ट्रीयकरण किया गया और उसके बाद जब भारत आजाद हो गया तब भी भारतीय रिज़र्व बैंक को वैसे का वैसे ही रखा गया बदलाव नहीं लाये गए।
  • फिर भारतीय रिज़र्व बैंक भारत के सभी बैंको का प्रबंधन करने लगा और फिर उसके बाद सन 1959 में भारतीय स्टेट बैंक और उससे सम्बंधित 8 क्षेत्रीय बैंक क भी राष्ट्रीयकरण किया गया और उन सभी को भारतीय स्टेट बैंक का अनुषंगी बांया गया यह बदलाव एक बहुत ही बदलाव था जो की भारत सरकार द्वारा किया गया।
  • इन सभी बैंकों के नामा कुछ इस प्रकार हैं तो कृपा कर ध्यान से पढ़े – इसमें स्टेट बैंक ऑफ़ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ़ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ़ इंदौर, स्टेट बैंक ऑफ़ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ़ इन्दौर और स्टेट बैंक ऑफ़ पटियाला प्रमुख हैं.
  • इसके बाद सन 19 जुलाई 1969 में भारतीय सरकार द्वारा एक बहुत बड़ा कदम बढ़ाया गया और 1959 के बाद इन्होने 14 बैंकों का भी राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। पहले भारत ने केवल 8 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था और उसके सिर्फ 10 वर्ष के बाद ही भारत सर्कार ने इतने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया यह पहले के मुक़ाबले काफी बड़ा कदम था।
  • इसकी वजह से भारत के सभी बैंकों की विश्वसनीयता में भी बढ़ोतरी हुई और फिर भारत में बैंकिंग प्रणाली पहले के मुताबिक़ और भी अधिक मजबूत हो गयी थी।
  • फिर उसके करीब 11 वर्ष बाद भारतीय सरकार ने 15 अप्रेल 1980 को फिर से 6 प्राइवेट बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया।
  • सन 1993 में भारतीय बैंकिंग क्षेत्र ने एक बड़ा कदम उठाया और फिर भारतीय रिज़र्व बैंक के द्वारा सभी प्राइवेट क्षेत्र के बैंकों को लोगो को बैंकिंग सुविधाएँ प्रदान करने की अनुमति दी गयी। फिर उसके बाद देश के सभी प्राइवेट बैंक भी सभी सरकारी बैंक की तरह देश की जनता को बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करने लगे।

भारत में बैंकिंग प्रणाली के प्रकार

बैंक हमको बहुत सी सुविधाएँ प्रदान करता हैं जिसको बैंकिंग प्रणाली भी कहते हैं इसकेकुछ प्रकार भी होते हैं जिसके बारे में हम आपको यहाँ कुछ जानकरी बताने वाले हैं तो कृपा कर ध्यान से पढ़े

बैंकिंग प्रणाली के बहुत से प्रकार होते हैं जिनके बारे में हम आपको यहां पर बताने वाले हैं

  1. वाणि​ज्यिक बैंकिंग (Commercial banking)
  2. इन्वेस्टमेंट बैंकिंग (Investment Banking)
  3. रिटेल बैंक (Retail banking)
  4. सेंट्रल बैंक्स (Central banking)
  5. क्रेडिट यूनियन्स या लघु ऋण संगठन (Credit Union banking)
  6. ऑनलाइन बैंक (Online banking)
  7. म्यूचुअल बैंकिंग (Mutual banking)

Banking System से सम्बंधित कुछ प्रश्न और उनके उत्तर

भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना कब की गयी थी ?

भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को कोलकाता में हुई थी परन्तु भारतीय रिज़र्व बैंक का राष्ट्रीयकरण 1949 में किया गया था।

भारत का सबसे पुराना बैंक कौनसा हैं और उसकी स्थापना कब हुई थी ?

भारत का सबसे पुराना बैंक State Bank of India हैं और इसकी स्थापना 1 July 1955 को हुई थी।

भारत में अंग्रेजों द्वारा सबसे पहले कौनसा बैंक खोला गया था एवं उसका नाम क्या था ?

भारत में सबसे पहले अंग्रेजों द्वारा बैंक बंगाल में खोला गया था क्योंकि अंग्रेजों का प्रभाव सबसे पहले बंगाल की ओर पढ़ा था इसलिए उन्होंने उसकी स्थापना वहीँ की और उन्होंने उस बैंक का नाम बैंक ऑफ़ बंगाल रखा था।

पूर्व समय में किस पद का जिक्र किया गया है जो की पहले के समय में लोगो के पैसे सँभालने का कार्य करते थे ?

पूर्व समय में कुसीदिन पद का जिक्र किया गया है जो की पहले के समय में लोगो के पैसे सँभालने का कार्य करते थे

भारत के सबसे पहले तीन बैंकों के नाम बताइये जिनकी स्थापना अंग्रेजों द्वारा की गयी थी

भारत में सबसे पहले तीन बैंक खोले गए थे जिनकी स्थापना अंग्रेजों के द्वारा की गयी थी जो कुछ इस प्रकार हैं
1. बैंक ऑफ़ बंगाल की स्थापना 1809 में हुई थी
2. बैंक ऑफ़ बॉम्बे की स्थापना 1840 में हुई थी
3. बैंक ऑफ़ मद्रास की स्थापना 1843 में हुई थी

प्राचीन काल में जब कोई की को उधार देता था और उससे जब एक एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करवाएं जाते थे उस अग्रीमनेट को क्या कहते थे

प्राचीन काल में उधर देते वक़्त जब एक एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करवाएं जाते थे उस अग्रीमेंट को ऋण पत्र या ऋण पन्ने के नाम से जाना जाता था।

स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया का पूर्व नाम क्या था और उसके किसके द्वारा कण्ट्रोल किया जाता था ?

स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया एक बहुत ही पुराना बैंक हैं पूर्व समय में इसका नाम इंपीरियल बैंक था और इसको ब्रिटैन की महारानी के द्वारा कण्ट्रोल किया जाता था।

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