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अटल बिहारी वाजपेयी जीवन परिचय (जीवनी) चरित्र चित्रण, विशेषताएं, प्रेम प्रसंग, उपलब्धियां, सामाजिक कार्य

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भारतीय राजनीति के भीष्म पितामह पूर्व प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी को एक कुशल राजनीतिज्ञ, भाषाविद, कवि और पत्रकार के रूप में जाना जाता है। अटल जी एक ऐसे नेता हैं जिन्हे जनता के साथ साथ हर पार्टी के लोग पसंद करते हैं।

यहां आप अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी के बारे में अध्ययन करेंगे। अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन की कहानी की मदद से आप अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में बहुत सारे तथ्य जानेंगे।

अटल बिहारी वाजपेयी जीवन परिचय (Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi)

अटल बिहारी वाजपेयी
पूरा नाम
अटल बिहारी वाजपेयी
जन्म
25 दिसंबर 1924 ग्वालियर, मध्य प्रदेश
राष्ट्रीयता
भारतीय
राजनैतिक दल
भारतीय जनता पार्टी
कार्य/पद
राजनेता, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री
पिता का नाम
कृष्ण बिहारी वाजपेयी
माता का नाम
कृष्णा देवी
शिक्षा (बी०ए०)
विक्टोरिया कालेज (वर्तमान में लक्ष्मीबाई कालेज)
सम्मान
भारत रत्न 2014 दिसम्बर – (2015)
प्रथम शासनकाल
16 मई 1996 – 1 जून 1996
द्वितीय शासनकाल
19 मार्च 1998 – 22 मई 2004

अटल बिहारी वाजपेयी जीवन घटनाक्रम (टाइमलाइन)

1924: अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म ग्वालियर शहर में हुआ।

1942: भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया।

1957: पहली बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए।

1980: बीजेएस और आरएसएस के साथियों के साथ मिलकर बीजेपी की स्थापना की।

1992: देश की उन्नति में योगदान के लिए पद्म विभूषण पुरस्कार दिया गया।

1996: पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने।

1998: दूसरी बार भी देश के प्रधानमंत्री बने।

1999: तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने और दिल्ली से लाहौर के बीच बस सेवा संचालित कर इतिहास रचा ।

2005: दिसंबर माह में राजनीति से संन्यास ले लिया।

2015: देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया।

2018: 11  जून 2018, मृत्यु

अटल बिहारी वाजपेयी जीवनी Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi

भारत के सर्वोच्च पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित व् भारत के ग्यारहवें प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्म जन्म 25 दिसंबर, 1924 को ग्वालियर, मध्य प्रदेश ने हुआ था और वर्तमान में उनका जन्म दिवस “गुड गवर्नेंस डे” के रूप में मनाया जाता हैं| अटल बिहारी वाजपेयी जी भारतीय राजनीति के अलावा हिन्दी कवि, पत्रकार व प्रखर प्रभावशाली वक्ता भी हैं। साथ ही वाजपेयी जी भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वाले महापुरुषों में से एक हैं और वे 1968 से 1973 तक उसके अध्यक्ष भी रहे।
परिवार: बिहारी वाजपेयी के पिता कृष्ण वाजपेयी, माता कृष्णा देवी, भाई अवध बिहारी वाजपेयी, प्रेम बिहारी वाजपेयी, सुदा बिहारी वाजपेयी और इनकी बहनों का नाम उर्मिला मिश्रा, विमल मिश्रा, कमला देवी हैं। अटल की दत्तक पुत्री नमिता D/O  राजकुमारी कौल का प्रेम विवाह रंजन भट्टाचार्य से हुआ है। पिता कृष्णा बिहारी वाजपेयी जी अपने गाँव के एक महान कवी और एक अध्यापक थे।
शिक्षा: अटल बिहारी वाजपेयी ने ग्वालियर के बारा गोरखी ग्राम सभा के गवर्नमेंट इंटर मीडिएट स्कूल से शिक्षा प्राप्त किया। उसके बाद उन्होंने ग्वालियर के लक्ष्मी बाई कॉलेज से ग्रेजुएशन की शिक्षा प्राप्त किया, ग्रेजुएशन के उपरांत कानपुर के दयानन्द एंग्लों-वैदिक कालेज से इकोनोमिक्स से उन्होंने पोस्ट ग्रेजएशन किया । आगे की पढाई के लिए अटल जी लखनऊ के लॉ कॉलेज में आगे की पढ़ाई के लिए आवेदन भी किया था, लेकिन उनका पढ़ाई से मन रूठ गया और वे आरएसएस की पब्लिश मैगजीन में एडिटर के रूप में कार्य करने लगे। अटल जी एक सच्चे देश भक्त रहे इन्होने पढ़ाई करते समय भी आजादी की लड़ाई में दिग्गज नेताओं के साथ लड़ाई में बराबर का सहयोग किया और उस समय हिंदी न्यूज पेपर के एडिटर के रूप में कार्य किया।

अटल बिहारी वाजपेयी का राजनीतिक जीवन – Political Life of Atal Bihari Vajpayee

अटल जी पत्रकार से राजनेता का सफर:

अटल जी एक अच्छे पत्रकार के रूप में कार्य और राजनेता तथा कवि के रूप में जाने जाते हैं। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में बड़े-बड़े नेताओं के साथ आंदोलन में भाग लिया, इस आंदोलन के दौरान इन्हे जेल भी जाना पड़ा। इसी दौरान अटल जी की मुलाक़ात भारतीय जनसंघ के लीडर श्यामा प्रशाद मुखर्जी से हुई, अटल जी ने मुखर्जी जी के साथ राजनीती के दाव पेंच सीखे और उन्हें अपना गुरु स्वीकार किया कुछ ही दिन बाद मुखर्जी का स्वास्थ खराब होने से जल्दी ही उनकी मृत्यु हो गई। अटल बिहारी वाजपेयी का राजनितिक सफर निरंतर संघर्षमय रहा है।

जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान: 

अटल बिहारी वाजपेयी ने लाल बहादुर शास्त्री की तरह उन्ही के रास्ते पर चलते हुए भारत को एक नया नारा दिया है उन्होंने लालबहादुर शास्त्री के नारे जय जवान जय किसान के साथ जय विज्ञान जोड़कर “जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान” का नारा देकर अपनी विलक्षण प्रतिभा का परिचय देनेवाले दिया है।
  • भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी वाजपेयी अपने राजनैतिक जीवन में 9 बार लोकसभा के सदस्य रहे हैं।
  • 5 बार लखनऊ से लोकसभा सदस्य चुने गए अटल जी बतौर प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा करने वाले इकलौते गैर कांग्रेसी नेता है।
  • 1951 में अटल जी भारतीय जन संघ के संस्थापक सदस्य बने।
  • 1957 में जन संघ ने अटल बिहारी वाजपेयी को तीन लोकसभा सीटों लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से चुनाव लड़ाया था, वाजपेयी जी लखनऊ और मथुरा से चुनाव हार गए लेकिन बलरामपुर से चुनाव जीतकर वो दूसरी लोकसभा में पहुंचे थे।
  • 1968 से 1973 तक बाजपेयी जी भारतीय जन संघ के अध्यक्ष रहे।
  • 26 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक आपातकाल (21 महीने) की अवधि के दौरान अटल बिहारी बाजपेयी को जेल जाना पड़ा।
  • 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी के तानाशाही रवैये से त्रस्त होकर देश की जनता के हितों की रक्षा के लिए समाजवादी लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर अटल जी ने ‘जनसंघ’ का विलय ‘जनता पार्टी ‘ में कर दिया। लोकनायक जयप्रकाश नारायण एवं अटल बिहारी वाजपेयी के सहयोग से बनी जनता पार्टी भारतीय जनमत को पसंद आयी और चुनाव में ऐतिहासिक विजय के साथ केंद्र में श्री मोरारजी देसाई के नेतृत्व में जनता पार्टी की सरकार का गठन हुआ।
  • 1977 में अटल बिहारी वाजपाई को जनता पार्टी की सरकार में विदेश मंत्री बनाया गया। विदेश मंत्री रहते हुए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में हिंदी में भाषण दिया था और जिसे अटल जी अपने जीवन का अब तक का सबसे सुखद पल बताते हैं।
  • 1980 में बाजपेयी जी बीजेपी के संस्थापक सदस्य रहे।
  • 1980 से 1986 तक अटल जी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष रहे और इस दौरान वे बीजेपी संसदीय दल के नेता भी रहे।
  • 1984 में अटल बिहारी वाजपेयी ग्वालियर की सीट से कांग्रेस के माधवराव सिंधिया के द्वारा पराजित हो गए थे।
  • 1962 से 1967 और 1986 में श्री अटल बिहारी वाजपेयी राज्यसभा के सदस्य भी रहे।
  • 16 मई 1996 को अटल जी पहली बार 13 दिन के लिए प्रधानमंत्री बने।
  • 31 मई 1996 को वाजपेयी जी प्रधान मंत्री पद से त्यागपत्र देना पड़ा।
  • 1986 से 1998 तक अटल जी लोकसभा में विपक्ष के नेता रहे।
  • 1998 के चुनाव में अटल जी ने लोकसभा में अपने गठबंधन का बहुमत सिद्ध किया और एक बार फिर प्रधानमंत्री बने, किन्तु एआईएडीएमके द्वारा गठबंधन से समर्थन वापस ले लेने के कारण उनकी सरकार पुनः गिर गई और एक बार फिर देश को आम चुनाव झेलना पड़ा।
  • 1999 के चुनाव में वाजपेयी के नेतृत्व राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साझा घोषणापत्र पर चुनाव लड़े गए और इन चुनावों में वाजपेयी के नेतृत्व को एक प्रमुख मुद्दा बनाया गया। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को बहुमतमिला और श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली।
अटल जी मई 1998 में राजिस्थान के पोखरम में 5 अंडरग्राउंड नूक्लियर का सफल टेस्ट के जस्ट बाद

अटल बिहारी वाजपेयी के बड़े मुख्य काम –

  • सत्ता में आने के जस्ट 1 महीने बाद अटल जी व उनकी सरकार ने मई 1998 में राजिस्थान के पोखरम में 5 अंडरग्राउंड नूक्लियर का सफल टेस्ट करवाए. परीक्षण पूरी तरह से सफल रहा, जिसकी चर्चा देश विदेश में भी जोरों पर रही.
  • अटल जी द्वारा शुरू किये गए नेशनल हाईवे डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (NHDP) व प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) उनके दिल के बेहद करीब थी, वे इसका काम खुद देखते थे. NHDP के द्वारा उन्होंने देश के चार मुख्य शहर दिल्ली, मुंबई, चेन्नई व कोकत्त्ता को जोड़ने का काम किया. PMGSY के द्वारा पुरे भारत को अच्छी सड़कें मिली, जो छोटे छोटे गांवों को भी शहर से जोड़ती.
  • कारगिल युद्ध व आतंकवादी हमले के दौरान अटल जी द्वारा लिए गए निर्णय, उनकी लीडरशिप व कूटनीति ने सबको प्रभावित किया जिससे उनकी छवि सबके सामने उभर कर आई.

अटल बिहारी वाजपेयी की मुख्य रचनाएं – Creations by Atal Bihari Vajpayee Hindi

अटल बिहारी वाजपेयी जी द्वारा अनेकों रचनायें लिखी व् प्रकाशित की गई है जैसे मृत्यु या हत्या, अमर बलिदान (लोक सभा में अटल जी के वक्तव्यों का संग्रह), कैदी कविराय की कुण्डलियाँ, संसद में तीन दशक, अमर आग है, कुछ लेख: कुछ भाषण, सेक्युलर वाद, राजनीति की रपटीली राहें, बिन्दु बिन्दु विचार, मेरी इक्यावन कविताएँ आदि उनकी प्रमुख रचनाएं है।

अटल बिहारी वाजपेयी जी को सम्मान एवं पुरस्कार – Atal Bihari Vajpayee Awards and Honours

अटल बिहारी वाजपेयी जी को उनके निष्ठा पूर्वक कार्य के लिए अनेकों पुरस्कारों से सम्मानित किया है. उन्हें,
1992: देश की उन्नति में योगदान के लिए पद्म विभूषण ,
1993: डी लिट(डॉक्टरेट इन लिटरेचर) (कानपुर विश्वविद्यालय),
1994: लोकमान्य तिलक पुरस्कार,
1994: श्रेष्ठ सासंद पुरस्कार,
1994: भारत रत्न पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार व्
2015: डी लिट (डॉक्टरेट इन लिटरेचर) (मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय),
2015: ‘फ्रेंड्स ऑफ बांग्लादेश लिबरेशन वार अवॉर्ड’, (बांग्लादेश सरकार द्वारा प्रदत्त)
2015: भारतरत्न से सम्मानित किया गया|
सम्मानित अवार्डवर्ष
भारत रत्न2015
लिबरेशन वॉर अवार्ड (बांग्लादेश मुक्तिजुद्धो सम्मनोना)2015
भारत रत्न पंडित गोविन्द वल्लभ पन्त अवार्ड1994
बेस्ट संसद व्यक्ति का पुरस्कार1994
लोकमान्य तिलक पुरस्कार1994
डी.लिट (डॉक्टरेट इन लिटरेचर), कानपूर यूनिवर्सिटी1993
पद्म विभूषण1992

अटल बिहारी वाजपेयी जी के जीवन काल से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण व् रोचक तथ्य – Facts about Atal Bihari Vajpayee in Hindi

आजीवन अविवाहित रहने का व्रत: अटल बिहारी वाजपेयी जी ने अपना निजी अविवाहित जीवन जनता की सेवा में समर्पित कर दिया है जो कि एक त्याग एवं तपस्या का प्रमाण है जिसका उद्देश्य है, हर व्यक्ति को अपनी इच्छा अनुसार अपना जीवन व्यतीत करने का अधिकार होना चाहिए। वाजपेयी आजीवन अविवाहित राजनितिक सेवा के संकल्प  की वजह से आज तक कुवांरे रहे हैं। वाजपेयी ने अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारंभ किया और उसका बखूबी निर्वाह भी किया हैं।

अटल जी की दत्तक पुत्री नमिता: वाजपेयी जी ने नमिता को गोद लिया है। भारतीय डांस एवं म्यूजिक में नमिता को काफी अभिरुचि है, टूर करना प्राकृतिक स्थलों पर घूमना नमिता को काफी पसंद है, वे हमेशा हिमाचल प्रदेश के सुविख्यात स्थान मनाली में छुट्टिया मनाने जाती  हैं।

अटल जी के मित्र: पहले सुनहरे दिनों की तरह अब न तो कोई कविता सुनने आता है और न ही कोई पार्टी की शिकायत लेकर आता है। अटल बिहारी वाजपेयी के खास मित्रों में एन एम घटाटे, एल के अडवाणी, बी सी खंडूरी नियमितरूप से उनसे मिलने आते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह नियमित उनके स्वास्थ का समाचार लेते रहते हैं एवं समय समय पर मिलते रहते हैं।

अटल जी का अलौकिक अटल प्रेम: 1940 के दशक में किशोरावस्था की दहलीज पर जब अटल बिहारी वाजपेयी ने कदम रखा तो आँखों ही आँखों में उनकी सहपाठी राजकुमारी कौल से प्रेम हो गया था। अटल जी ने राजकुमारी कौल को गुप्त लवलेटर लिखा किन्तु जवाब न आने से बहुत निराश हुए। अटल जी का राजकुमारी के लिए लाइब्रेरी में लिखा पहला प्रेमपत्र एक किताब के अंदर रखकर भेजा था, लेकिन उन्हें उस लवलेटर का कोई जवाब नहीं मिला। जब कि वास्तविकता यह थी की राजकुमारी ने प्रेमपत्र का जवाब किताब के अंदर ही रखकर अटल को दे दिया था किन्तु किसी कारणबस वह अटल तक नहीं पहुंच सका।  अटल जी को सायद यह आभास नहीं था कि 15 साल बाद उनके जीवन की भाग्य रेखाएं बदलने वाली हैं। अटल जी का प्रेम देश के राजनीतिक गलियारे घटी सबसे महान प्रेम कथा है। Great love story of grate politician, poet, writer Atal Bihari Bajpayee.

वाजपेयी जी की पसंद: अटल जी को कविता एवं संगीत बेहद पसंद है, अटल जी के पसंदीदा मुकेश कुमार, लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के गीत है।

राजनीती से जुड़े रहने के बावजूद व् एक अच्छे ओजस्वी एवं पटु वक्ता (ओरेटर) एवं सिद्ध हिन्दी कवि भी रहें हैं| भारत के सेन्य शक्ति की बात करे तो इन्होने अग्नि-दो और परमाणु परीक्षण कराया और बता दिया की भारत भी किसी देश के सेन्य विकास से कम नहीं है और ये भारत देश की सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ा साहस भरा कदम था| अग्नि-दो और परमाणु परीक्षण कराने के बाद भारत ने सन् 1998 परमाणु का द्वितीय परीक्षण और इसकी जरा से भी भनक अमेरिका की सी०आई०ए० तक को नहीं लगने दी थी| भारत के लिए यह एक गर्व की बात है जब अटल जी ने संयुक्त राष्ट्र संघ में अपना भाषण हिंदी भाषा में दिया जोकि भारत के लिए एक गर्व की बात थी| अटल बिहारी वाजपेयी जी अब तक के पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने एक गठबंधन सरकार न सिर्फ मजबूती से स्थिर रखा बल्कि लम्बे समय तक उसे सफलता पूर्वक चलाया|

अटल जी द्वारा की गई प्रमुख टिप्पणियाँ – Atal Bihari Vajpayee Notes

"भारत को लेकर मेरी एक दृष्टि है- ऐसा भारत जो भूख, भय, निरक्षरता और अभाव से मुक्त हो।" "क्रान्तिकारियों के साथ हमने न्याय नहीं किया, देशवासी महान क्रान्तिकारियों को भूल रहे हैं, आजादी के बाद अहिंसा के अतिरेक के कारण यह सब हुआ "मेरी कविता जंग का ऐलान है, पराजय की प्रस्तावना नहीं। वह हारे हुए सिपाही का नैराश्य-निनाद नहीं, जूझते योद्धा का जय-संकल्प है। वह निराशा का स्वर नहीं, आत्मविश्वास का जयघोष है
अटल बिहारी वाजपेयी जी का अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारम्भ किया था और देश के सर्वोच्च पद पर पहुँचने तक उस संकल्प को पूरी निष्ठा से निभाया।
IMAGES CREDIT : NDTV Atal Bihari Vajpayee: A Life In Pictures

अटल बिहारी वाजपेयी की कविता

कौरव कौन
कौन पांडव,
टेढ़ा सवाल है।

दोनों ओर शकुनि
का फैला
कूटजाल है।

धर्मराज ने छोड़ी नहीं
जुए की लत है।
हर पंचायत में
पांचाली
अपमानित है।

बिना कृष्ण के
आज
महाभारत होना है,
कोई राजा बने,
रंक को तो रोना है।
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झुक नहीं सकते | कविता

टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते।
सत्य का संघर्ष सत्ता से,
न्याय लड़ता निरंकुशता से,
अंधेरे ने दी चुनौती है,
किरण अंतिम अस्त होती है।

दीप निष्ठा का लिये निष्कंप,
वज्र टूटे या उठे भूकंप,
यह बराबर का नहीं है युद्ध,
...More...

कवि आज सुना वह गान रे

कवि आज सुना वह गान रे,
जिससे खुल जाएँ अलस पलक।
नस-नस में जीवन झंकृत हो,
हो अंग-अंग में जोश झलक।

ये - बंधन चिरबंधन
टूटें - फूटें प्रासाद गगनचुम्बी
हम मिलकर हर्ष मना डालें,
हूकें उर की मिट जाएँ सभी।

यह भूख - भूख सत्यानाशी
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आओ फिर से दीया जलाएं | कविता

आओ फिर से दिया जलाएं
भरी दूपहरी में अधियारा
सूरज परछाई से हारा
अंतरतम का नेह निचोड़े
बुझी हुई बाती सुलगाएं
आओ कि से दीया जलाएं।

हम पड़ाव को समझे मंजिल
लक्ष्य हुआ आँखों से ओझल
वर्तमान के मोहजाल में
...More...

एक बरस बीत गया | कविता

एक बरस बीत गया
झुलसाता जेठ मास
शरद चाँदनी उदास
सिसकी भरते सावन का
अंतर्घट रीत गया
एक बरस बीत गया

सींकचों में सिमटा जग
किंतु विकल प्राण विहग
धरती से अंबर तक
गूँज मुक्ति गीत गया
एक बरस बीत गया

पथ निहारते नयन
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यक्ष प्रश्न - अटल बिहारी वाजपेयी की कविता

जो कल थे,
वे आज नहीं हैं।
जो आज हैं,
वे कल नहीं होंगे।
होने, न होने का क्रम,
इसी तरह चलता रहेगा,
हम हैं, हम रहेंगे,
यह भ्रम भी सदा पलता रहेगा।

सत्य क्या है?
होना या न होना?
या दोनों ही सत्य हैं?
जो है, उसका होना सत्य है,
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पंद्रह अगस्त की पुकार

पंद्रह अगस्त का दिन कहता -
आज़ादी अभी अधूरी है।
सपने सच होने बाकी है,
रावी की शपथ न पूरी है।।

जिनकी लाशों पर पग धर कर
आज़ादी भारत में आई।
वे अब तक हैं खानाबदोश
ग़म की काली बदली छाई।।

कलकत्ते के फुटपाथों पर
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कैदी कविराय की कुंडलिया

गूंजी हिन्दी विश्व में स्वप्न हुआ साकार,
राष्ट्रसंघ के मंच से हिन्दी का जैकार।
हिन्दी का जैकार हिन्द हिन्दी में बोला,
देख स्वभाषा-प्रेम विश्व अचरज में डोला।
कह कैदी कविराय मेम की माया टूटी,
भारतमाता धन्य स्नेह की सरिता फूटी।।

बनने चली विश्वभाषा जो अपने घर में दासी,
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गीत नहीं गाता हूँ | कविता

बेनकाब चेहरे हैं,
दाग बड़े गहरे हैं,
टूटता तिलस्म, आज सच से भय खाता हूँ ।
गीत नही गाता हूँ ।

लगी कुछ ऐसी नज़र,
बिखरा शीशे सा शहर,
अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूँ ।
गीत नहीं गाता हूँ ।

पीठ मे छुरी सा चाँद,
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ऊँचाई | कविता

ऊँचे पहाड़ पर,
पेड़ नहीं लगते,
पौधे नहीं उगते,
न घास ही जमती है।

जमती है सिर्फ बर्फ,
जो, कफ़न की तरह सफ़ेद और,
मौत की तरह ठंडी होती है।
खेलती, खिलखिलाती नदी,
जिसका रूप धारण कर,
अपने भाग्य पर बूंद-बूंद रोती है।

ऐसी ऊँचाई,
...More...                                                                                                     - अटल बिहारी वाजपेयी

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