-->

National Doctor's Day : क्यों मनाते हैं राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस, इसका इतिहास और थीम

"National Doctor's Day 2020" इस वजह से मनाते हैं नेशनल डॉक्टर्स डे, महत्व के साथ Doctor's Day के बारे में जानें सबकुछ !!
नाम
National Doctor's Day (राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस)
कब मनाया जाता है ?
1 जुलाई
मनाने का तरीका
वार्षिक
कौन मनाता हैं ?
भारत, क्यूबा, अमेरिका, वियतनाम, ब्राज़ील, नेपाल, ईरान आदि
पहली बार कब मनाया गया ?
30 मार्च 1933
पहली बार किसने मनाया ?
जार्जिया (यूएस)

National Doctor's Day 2020 राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस

भारत में 1 जुलाई को और अमेरिका में 30 मार्च को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है. यह दिन सभी डॉक्टरों को उनकी सेवा के लिए धन्यवाद देने के लिए मनाया जाता है. भारत में हर साल 01 जुलाई को नेशनल डॉक्टर्स डे (National Doctor's Day, July 01) मनाने का इतिहास काफी गौरवमय है.


भारत में हर साल 01 जुलाई को नेशनल डॉक्टर्स डे (National Doctor's Day, July 01) मनाने का इतिहास काफी गौरवमय है. जिंदगी में डॉक्टर का कितना महत्व है, हम यह अच्छी तरह से जानते हैं. डॉक्टर को इंसान के रूप में भगवान के समान माना जाता है. यह आज के संदर्भ एक दम सटीक हो सकता है जब पूरी दुनिया कोरोना वायररस (Coronavirus) महामारी से पीड़ित है ऐसे में डॉक्टर्स अपनी जान की परवाह किए बगैर दूसरों के जीवन की रक्षा कर रहे हैं. भारत में डॉक्टर्स को सम्मान देने के लिए हर साल राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे मनाया जाता है, लेकिन डॉक्टर्स डे (Doctor's Day) मनाने का सिर्फ यही एक कारण नहीं नहीं है. इसके पीछे एक और कारण जुड़ा है. हर साल नेशनल डॉक्टर्स डे की थीम (National Doctors Day Theme) रखी जाती है. पिछले साल डॉक्टर दिवस की थीम (National Doctor's Day 2019 Theme) हैं 'डॉक्टरों के प्रति हिंसा को लेकर जीरो सहनशीलता' (Zero Tolerance To Violence Against Doctors And Clinical Establishment) रखी गई थी. केंद्र सरकार ने 1991 में इस दिन को मनाने की शुरूआत की थी.

डॉक्टर्स डे कब और कहाँ मनाया जाता है (When and Where Doctors Day is Celebrated) 

डॉक्टर्स डे भारत के साथ – साथ कुछ अन्य देशों में भी मनाया जाता है. यह दिवस कब और कहाँ मनाया जाता है यह नीचे दर्शाया गया है –
भारत :- हमारे देश में 1 जुलाई को मनाया जाता है, जोकि यहाँ के एक महान चिकित्सक की जन्म तिथि के साथ – साथ उनकी मृत्यु की तिथि भी है. उनका नाम डॉ बिधान चंद्र रॉय था.
ब्राज़ील :- यहाँ 18 अक्टूबर को छुट्टी के रूप में राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे मनाया जाता है, यह कैथोलिक चर्च सेंट ल्यूक का जन्मदिवस है. जोकि वहां के एक महान डॉक्टर थे.
क्यूबा :- यहाँ कार्लोस जुआन फिनले के जन्मदिन मनाने के लिए 3 दिसंबर को राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे छुट्टी के रूप में मनाया जाता है. ये क्यूबा के चिकित्सक और वैज्ञानिक थे जिन्होंने पीले बुखार का शोध किया था, और इसके लिए वे पहचाने गये थे.
ईरान :- ईरान में इस दिन को 23 अगस्त के दिन मनाया जाता है जोकि वहां के महान डॉक्टर एविसेना का जन्मदिवस था.
अमेरिका :- अमेरिका में यह 30 मार्च को मनाया जाता है, जोकि वह दिन है जिस दिन चिकित्सकों की सेवा को सालाना मान्यता प्राप्त होती है. इस दिन को मनाने का विचार डॉ चार्ल्स बी. आलमंड एवं उनकी पत्नी यूडोरा ब्राउन आलमंड को आया था. और यह दिन सर्जरी में सामान्य एनेस्थीसिया के उपयोग की पहली सालगिरह थी. दरअसल 30 मार्च सन 1942 को जेफरसन, जॉर्जिया में डॉ क्रावफोर्ड लॉन्ग ने जेम्स वेनेबल नामक एक मरीज को बेहोश करने के लिए ईथर का उपयोग किया. और बिना दर्द के उनकी गर्दन से ट्यूमर निकाला.
वियतनाम :- यहाँ 28 फरवरी सन 1955 को डॉक्टर्स डे की स्थापना की. तब से यह इस तारीख को या इसके आसपास की तारीख को मनाया जाता है.
नेपाल :- नेपाल देश में भी 4 मार्च के दिन डॉक्टर्स डे मनाया जाता है. नेपाल मेडिकल एसोसिएशन की स्थपना के बाद, नेपाल ने हर साल इस दिन को आयोजन किया. इस दिन डॉक्टर – रोगी संचार, क्लिनिकल इलाज और समुदाय आधारित स्वास्थ्य प्रचार पर देखभाल के बारे में चर्चा की जाती है.

क्यों मनाते हैं डॉक्टर्स डे

भारत में 01 जुलाई को डॉक्टर्स डे मनाने के पीछे का कारण यह है कि इस दिन देश के महान डॉक्टर्स और पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्य मंत्री विधानचंद्र रॉय का जन्म हुआ था. हालांकि डॉक्टर विधानचंद्र का इसी दिन पुण्यतिथि भी होती है. विधानचंद्र रॉय का जन्म 1 जुलाई 1882 को बिहार के पटना के खजांची में हुआ था. उन्हीं के सम्मान में नेशनल डॉक्टर्स डे मनाया जाता है.

कौन थे डॉ विधानचंद्र रॉय?

डॉ.बिधानचंद्र रॉय का जन्म 1 जुलाई, 1882 को हुआ था और उनका निधन भी इसी तारीख को 1962 में हुआ था। चिकित्सा के क्षेत्र में उन्होंने काफी योगदान दिया। डॉक्टरी की पढ़ाई करने 1909 में जब वह लंदन के प्रतिष्ठित सेंट बार्थोलोम्यू अस्पताल गए तो वहां के डीन ने उनके भारतीय होने के नाते दाखिला देने से इनकार कर दिया। रॉय डेढ़ महीने तक डीन के पास अपना आवेदन लेकर जाते रहे। उनकी जिद से थककर 30वीं बार में डीन ने उनका आवेदन स्वीकार किया। उसके बाद सिर्फ सवा दो साल में ही रॉय ने डिग्री हासिल कर ली और उन विरले लोगों में से एक हुए, जिन्होंने एक साथ फिजिशन और सर्जन की रॉयल कॉलेज की सदस्यता पाई। भारत लौटकर उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में विस्तृत काम किए। लोगों में यह गहरा भरोसा था कि डॉ. रॉय मरीज का चेहरा देखकर उसकी बीमारी के बारे में बता देते थे। 


वह सिर्फ बड़े लोगों के डॉक्टर नहीं थे बल्कि बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाओं को आम जनता की पहुंच के भीतर लाने के लिए वह जीवनभर कोशिश करते रहे। कोलकाता के कई बड़े हॉस्पिटल डॉ. रॉय की पहल पर ही शुरू हुए। राजनीति में आने के बाद उन्होंने कई संस्थाओं, नगरों और विश्वविद्यालयों की स्थापना की थी। 1928 में इंडियन मेडिकल असोसिएशन (आईएमए) की स्थापना में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की स्थापना में भी उनका बड़ा योगदान था। बड़े-बड़े पदों पर बैठने के बाद भी हर दिन गरीब मरीजों का इलाज अक्सर मुफ्त में करते रहे। 1961 में मृत्यु से ठीक पहले उन्होंने अपना घर और संपत्ति जनता के नाम कर दी। उसी बरस 4 फरवरी, 1961 को उन्हें 'भारत रत्न' भी दिया गया था। 

उन्होंने जिन पांच शहरों की स्थापना की, उनमें दुर्गापुर, कल्याणी, बिधाननगर और अशोकनगर प्रमुख हैं। कल्याणी से जुड़ी इतनी कहानियां हैं कि उन पर एक सुंदर फिल्म बनाई जा सकती है। कहा जाता है कि कल्याणी नगर डॉ. रॉय के प्रेम का प्रतीक है। जनता के बीच चर्चित कहानी कुछ इस तरह है: भारत लौटने के बाद डॉ. रॉय का शुरुआती वक्त कोशिशों और संघर्षों में बीता क्योंकि चिकित्सा उनके लिए सिर्फ पेशा नहीं बल्कि समाज के कल्याण और उत्थान का सबसे अहम माध्यम था। 

उनकी ख्याति एक शिक्षक एवं चिकित्सक के रूप में नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानी के रूप में महात्मा गांधी के साथ असहयोग आंदोलन में शामिल होने के कारण बढ़ी. भारतीय जनमानस के लिए प्रेम और सामाजिक उत्थान की भावना डॉ. राय को राजनीति में ले आई. वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य बने और बाद में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का पद संभाला. डॉ. राय को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था. उनके जन्म दिवस को डॉक्टर्स डे के रूप में मनाया जाता है.

कैसे मनाया जाता है डॉक्टर्स डे? 

हर साल सरकारी और गैर सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं की ओर से डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। इस मौके पर लोगों को डॉक्टरों के योगदान से अवगत कराया जाता है। इस दिन कई तरह के कार्यक्रमों और गतिविधियों का आयोजन होता है। लोगों को मुफ्त में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों और सार्वजनिक स्थानों पर मुफ्त चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया जाता है।

डॉक्टर्स डे का महत्व

 राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे के दिन डॉक्टरों द्वारा जान बचाने के लिए किए गए सभी प्रयासों और मेहनत का सम्मान किया जाता है. डॉक्टरों के पेशे नेक हैं, क्योंकि वे लगातार प्रयास कर रहे हैं कि लोगों को बेहतर महसूस कराया जा सके, चाहे वह दवा लेकर या जटिल सर्जरी करके. जैसे ही लोग कोरोनोवायरस के घातक फ्लू से जूझते हैं, दुनिया भर में डॉक्टरों की भूमिका अधिक सम्मानित हो जाती है.

आपको ये पोस्ट पसंद आ सकती हैं

टिप्पणी पोस्ट करें