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अंतर्राष्ट्रीय नस्लीय भेदभाव उन्मूलन दिवस | International Day for the Elimination of Racial Discrimination

अंतरराष्ट्रीय रंगभेद उन्मूलन दिवस
विवरण
अंतरराष्ट्रीय रंगभेद उन्मूलन दिवस समाज में समानता लाने के लिए लोगों को जागरूकता करने के लिए मनाया जाता है।
तिथि
21 मार्च
शुरुआत
वर्ष 1960
संबंधित लेख
अंतरराष्ट्रीय मानव एकता दिवस, अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस, अन्तरराष्ट्रीय छात्र दिवस
अन्य जानकारी
यह दिन उन घटनाओं की याद में मनाया जाता है जब 21 मार्च सन् 1960 को दक्षिणी अफ्रीका के शार्पविली में पुलिस ने रंगभेद के ख़िलाफ़ एक छात्र प्रदर्शन पर गोलियां चलाई थीं जिसके परिणामस्वरूप कई छात्र मारे गए थे।

नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन का अंतर्राष्ट्रीय दिवस: 21 मार्च

हर साल 21 मार्च को दुनिया भर में नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन का अंतर्राष्ट्रीय दिवस यानि International Day for the Elimination of Racial Discrimination मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1960 में दक्षिण अफ्रीका के शार्पविले में पुलिस द्वारा रंगभेद कानून के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने दौरान हुई 69 लोगों की हत्या की स्मृति में मनाया जाता है। इस वर्ष का नस्लीय भेदभाव उन्मूलन अंतर्राष्ट्रीय दिवस International Decade for People of African Descent पर केंद्रित है।

नस्लीय भेदभाव
किसी व्यक्ति या समुदाय से उसके जाति, रंग, नस्ल इत्यादि के आधार पर घृणा करना या उसे समान्य मानवीय अधिकारों से वंचित करना नस्लीय भेदभाव कहलाता है।

भारत देश में किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकने के लिए संविधान निर्माताओं ने अनुच्छेद 15 को बनाया है। अनुच्छेद 15 केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्म स्थान, या इनमें से किसी के ही आधार पर भेदभाव पर रोक लगाता है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक प्रस्ताव द्वारा International Decade for People of African Descent को साल 2015 से 2024 तक मनाया जाने की घोषणा की गई थी । जेनेवा में ह्यूमन राइट्स काउंसिल द्वारा 43 वें सत्र के हिस्से के रूप में अंतर्राष्ट्रीय डिसाइड फॉर पीपुल ऑफ अफ्रीकन डिसेंट को शामिल किया गया था। जबकि दशक 2020 में लगभग आधा होने की कगार पर है, इसलिए इस साल इसकी प्रगति की समीक्षा करने और आगे की अपेक्षित कार्रवाई के बारे में फैसला करने के लिए एक समीक्षा निर्धारित की गई है।




अंतर्राष्ट्रीय नस्लीय भेदभाव उन्मूलन दिवस चर्चा में क्यों?

दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जातिवादी व अतिवादी विचारधाराओं पर आधारित राष्ट्रवाद का प्रसार हो रहा है। इसके कारण नस्लवाद, विदेशियों के प्रति घृणा (ज़ेनोफोबिया) और असहिष्णुता तेज़ी से बढ़ रही है।

साथ ही विभिन्न देशों में प्रवासियों, शरणार्थियों, अश्वेतों खासकर अफ्रीकी मूल के लोगों के प्रति हिंसात्मक घटनाएँ भी बढ़ रही हैं।

ऐसे परिदृश्य में अंतर्राष्ट्रीय नस्लीय भेदभाव उन्मूलन दिवस मनाने का महत्त्व बढ़ जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय नस्ली  भेदभाव उन्मूलन दिवस के विषय (International Day for the Elimination of Racial Discrimination Themes)

Every year the International Day for the Elimination of Racial Discrimination is under one specific theme:
  • 2010: Disqualify Racism
  • 2014: The Role of Leaders in Combatting Racism and Racial Discrimination
  • 2015: Learning from tragedies to combat racial discrimination today
  • 2017: Racial profiling and incitement to hatred, including in the context of migration
  • 2018: Promoting tolerance, inclusion, unity and respect for diversity in the context of combating racial discrimination
  • 2019: Mitigating and countering rising nationalist populism and extreme supremacist ideologies
  • 2020: Recognition, justice and development: The midterm review of the International Decade for People of African Descent
अंतर्राष्ट्रीय नस्लीय भेदभाव उन्मूलन दिवस के विषय

हर साल नस्लीय भेदभाव के उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस एक विशिष्ट विषय के तहत है:
2010: जातिवाद को अयोग्य घोषित किया
2014: जातिवाद और नस्लीय भेदभाव के संयोजन में नेताओं की भूमिका
2015: आज नस्लीय भेदभाव का मुकाबला करने के लिए त्रासदियों से सीखना
2017: प्रवासन के संदर्भ में नस्लीय प्रोफाइलिंग और घृणा को उकसाना
2018: नस्लीय भेदभाव का मुकाबला करने के संदर्भ में सहिष्णुता, समावेश, एकता और विविधता के लिए सम्मान को बढ़ावा देना
2019: बढ़ते राष्ट्रवादी लोकलुभावनवाद और चरम वर्चस्ववादी विचारधाराओं का शमन और मुकाबला
2020: मान्यता, न्याय और विकास: अफ्रीकी मूल के लोगों के लिए अंतर्राष्ट्रीय दशक की मध्यावधि समीक्षा

अंतर्राष्ट्रीय नस्लीय भेदभाव उन्मूलन दिवस पृष्ठभूमि

  • 21 मार्च, 1960 को पुलिस ने दक्षिण अफ्रीका के शार्पविले में लोगों द्वारा नस्लभेदी कानून के खिलाफ किये जा रहे एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान आग लगा दी और 69 लोगों को मार डाला।
  • 1966 में इस दिन को याद करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों को खत्म करने के अपने प्रयासों को बढ़ाने के लिये अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का आह्वान किया।
  • 1979 में इस दिन महासभा ने जातिवाद और नस्लीय भेदभाव के प्रति कार्रवाई के लिये कुछ कार्यक्रम अपनाए।
  • इसी अवसर पर महासभा ने निर्णय लिया कि 21 मार्च से विश्व में प्रतिवर्ष यह दिवस मनाया जाएगा।

नस्लीय भेदभाव की चुनौती कायम

नस्लीय भेदभाव के हर स्वरूप के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय संधि के 1969 में लागू होने के 50 साल बाद भी यह चुनौती बनी हुई है. संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों से अपील करता रहा है कि नस्लवाद के अंत के लिए और सभी के लिए समानता और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए.

लेकिन राजनीतिक वजहों से इसे जल्द समाप्त किए जाने की अहमियत को नहीं समझा गया. इसके बजाए राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे भाषणों का इस्तेमाल किया जाता है जिससे प्रभुत्ववादियों के हौसले बुलंद होते हैं जबकि नस्लीय समूहों को बदनाम किया जाता है.

यूएन विशेषज्ञों का कहना है कि असहिष्णुता और भेदभाव से निपटना सिर्फ़ देशों या प्रशासनिक अधिकारियों की ही ज़िम्मेदारी नहीं है बल्किन हर व्यक्ति को इसमें अपनी भूमिका अदा करनी होगी. 

यूनेस्को प्रमुख ऑड्री अज़ोले ने अपने संदेश में कहा कि भेदभाव के ख़िलाफ़ लड़ाई में सभी को आगे बढ़कर हिस्सा लेने की ज़रूरत है. "नस्लीय भेदभाव, विदेशियों की नापसंदगी, और वर्चस्ववादी विचारधाराओं को भड़काने में इंटरनेट एक उर्वर भूमि की तरह काम करता है. कई बार इसके निशाने पर प्रवासी, शरणार्थी और अफ़्रीकी मूल के लोग होते हैं."

इससे निपटने के लिए यूनेस्को जागरूकता के प्रसार पर बल देता है. इन्ही प्रयासों के तहत यूनेस्को ने ऑनलाइन जगत में कायम भेदभाव से मुक़ाबले और इंटरनेट इस्तेमाल का अनुभव सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से मीडिया और सूचना साक्षरता के लिए नए औज़ार विकसित किए हैं. इससे आपसी समझ, विवेचनात्मक सोच और अंतरसांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.  

"हर रोज़, नस्लीय भेदभाव लोगों को रोज़गार, आवास और सामाजिक जीवन में उनके आधारभूत अधिकारों से ख़ामोशी से वंचित कर रहा है."

यूएन मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बाशलेट ने अपने एक वीडियो संदेश में ध्यान दिलाया कि हम जिन मूल्यों के लिए खड़े होते हैं, नस्लवाद उनके विरूद्ध है. उन्होंने कहा कि नस्लीय, धार्मिक, जातीय और राष्ट्रीय तौर पर वर्चस्ववाद का वास्तविकता में कोई आधार नहीं है.

स्रोत: www.un.org

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