World Cancer Day 2020 : कैंसर दिवस का थीम, इतिहास,क्यों और कैसे मनाया जाता है

World Cancer Day 2020: क्यों और कैसे हर साल मनाया जाता है विश्व कैंसर दिवस?


विश्व भर में 04 फरवरी को हर साल विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। साल 2019 से 2021 तक तीन साल के लिए विश्व कैंसर दिवस का विषय रखा गया है "मैं हूं और मैं रहूंगा" है। जिसका मतलब है कि हर किसी में क्षमता है कि वह कैंसर से लड़ सकता है। इसी थीम के अनुसार इन तीन सालों में कार्यक्रम होंगे। 
दुनिया की सभी जानलेवा बीमारियों में कैंसर सबसे ख़तरनाक है क्योंकि कई बार इसके लक्षणों का पता ही नहीं चलता। जब इस बिमारी के होने का खुलासा होता है, तब तक काफी देर हो चुकी है और कैंसर पूरे शरीर में फैल चुका होता है। इसी वजह से कई लोगों को उचित इलाज का समय ही नहीं मिल पाता और उनकी मौत हो जाती है। अगर वक्त पर कैंसर की बीमारी का पता चल जाए तो इसका इलाज संभव है। साल 2018 में कैंसर की बीमारी की वजह से दुनियाभर में 96 लाख से ज़्यादा मौतें हुई थीं।
विश्व कैंसर दिवस की स्थापना अंतरराष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ (यूआईसीसी) द्वारा की गई। यह एक अग्रणीय वैश्विक एनजीओ है। इसका लक्ष्य विश्व कैंसर घोषणा, 2008 के लक्ष्यों की प्राप्ति करना है। इसका प्राथमिक लक्ष्य 2020 तक कैंसर से होने वाली मौतों को कम करना है। अंतर्राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ (यूआईसीसी) की स्थापना साल 1933 में हुई थी। इस दिवस पर विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा कैंसर से बचाव के विभिन्न अभियान चलाए।

आखिर कैंसर क्या है?

जब शरीर की कोशिकाओं के समूह अनियंत्रित तरीके से बढने लगते है तो ये कैंसर का रूप धारण कर लेते हैं. यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है. कैंसर 100 से अधिक तरीके का होता है.
कैंसर होने के कारण
जैसा की हम जानते हैं कि कैंसर कई प्रकार के‍ होते हैं. उनके होने के कारण भी अलग-अलग होते हैं. यदि आप किसी गंभीर बीमारी के लिए दवा ले रहे हैं तो इन दवाओं के साइड इफेक्ट्स (Side Effects) के कारण भी आपको कैंसर हो सकता है लेकिन कुछ कारण ऐसे भी हैं जिनकी वजह से आपको कैंसर जैसी बीमारी हो सकती है जैसे –
- धूम्रपान करना
- अधिक वजन होना
- पौष्टिक आहार ना लेना
- तंबाकू चबाना
- व्यायाम ना करना... इत्यादि

कैंसर के लक्षण

- लंबे समय तक गले में खराश होना
- लगातार खांसी आना
- आहार निगलने में दिक्कत होना
- शरीर में किसी भी तरह की गांठ का अनियंत्रित बढना
- कहीं से भी पानी या रक्त बहाव होना
- तिल का बढ़ना और रंग बदलना
- त्वचा में मस्सों का अधिक होना
- किसी भी घाव का लंबे समय तक ठीक न होना
- भूख कम लगना
- वजन कम होना
- थकान और आलस्य का बने रहना....इत्यादिविश्व

कैंसर दिवस का इतिहास

यूआईसीसी (केन्द्रीय अंतरराष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण) के नियंत्रण में और विभिन्न दूसरे प्रसिद्ध कैंसर समाजों, शोध संस्थानों, उपचार केन्द्रों और मरीजों के समूह की सहायता के साथ 1933 में स्वीट्ज़रलैण्ड के जेनेवा में विश्व कैंसर दिवस को मनाने की योजना की शुरुआत हुई थी। इस घातक बीमारी को नियंत्रित करने और लड़ने के लिये सभी जरुरतों को पूरा करने के लिये विश्व कैंसर दिवस के कार्यक्रम स्थापना हुई थी।
एक रिपोर्ट के अनुसार ये ध्यान देने योग्य है कि 12.7 मिलीयन से अधिक लोगों की कैंसर की पहचान की गयी साथ ही हर वर्ष 7 मिलीयन लोग इस बीमारी से मरते हैं। इस संक्रामक बीमारी के खतरे से बचाने और इसके एहतियातन कदम का अनुसरण करने, लोगों को इसके लक्षणों की जाँच करने के लिये निर्देश देना साथ ही साथ कैंसर से लाखों जीवन बचाने के लिये इस दिन के वार्षिक उत्सव को मनाने की योजना की शुरुआत की गयी। 4 फरवरी की स्थापना खासतौर से सही खान-पान के बारे में उन्हें सिखाने, नियमित और उचित शारीरिक क्रियाकलाप के लिये और एक सीख कि कैसे कैंसरकारी तत्व या परिस्थिति से बचाव किया जाए आदि कैंसर के प्रति लोगों में जागरुकता फैलाने के लिये की गयी है।

विश्व कैंसर दिवस क्यों मनाया जाता है

इसके पूर्व पहचान या रोकथाम के लिए कैंसर से बचाव के उपाय और ख़तरों के बारे में आम लोगों को जागरुक करने के लिए विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। लोगों को लगता है कि यह बीमारी छूने से फैलती है इसलिए कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को समाज में घृणा और अछूत के रूप में देखा जाता है। आम लोगों में कैंसर से संबंधित विभिन्न प्रकार के सामाजिक मिथक हैं जैसे कि कैंसर पीड़ित के साथ रहने या स्पर्श से उन्हें भी ये घातक बीमारी हो सकती है। इस तरह के मिथक को ख़त्म करने के लिए भी ये दिन मनाया जाता है। इसके होने के कारण, लक्षण और उपचार आदि जैसे कैंसर की सभी वास्तविकता के बारे में सामान्य जागरुकता बनाने के लिए इसे मनाया जाता है।

लोगों को जागरुक करने के लिए इस दिन पर विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं कि कैंसर से पीड़ित व्यक्ति को अलग से उपचारित न किया जाए, उन्हें समाज में एक आम इंसान की तरह जीने का अधिकार होना चाहिए और कोई भी रिश्ता उनके लिए बदलना नहीं चाहिए। अपने रिश्तेदारों के द्वारा उनकी हर इच्छाओं को पूरा करना चाहिए भले ही उनके जीने की उम्मीद कम क्यों न हों। ये बहुत ज़रूरी है कि उन्हें एक आम इंसान की तरह अच्छा महसूस कराना चाहिए और ऐसा प्रतीत नहीं कराना चाहिए जैसे उनको कुछ उपचार दिया जा रहा है क्योंकि वो मरने वाले हैं। उन्हें आत्म-सम्मान को महसूस करने की ज़रूरत है और अपने समाज और घर में एक सामान्य वातावरण की ज़रूरत है।

विश्व कैंसर दिवस कैसे मनाया जाता है

कैंसर से बचाव और इसके रोकथाम के बारे में खास संदेश फैलाने के लिये प्रमुख स्वास्थ्य संगठन के साथ ही गैर-सरकारी संगठन कैंप आयोजित करके, जागरुकता कार्यक्रम, रैली, भाषण, सेमिनार आदि के द्वारा भाग लेते है। विभिन्न नियंत्रित उपाय नीति लागू की गयी है तथा बड़ी संख्या में इससे जुड़ने के लिये लोगों को बढ़ावा दिया जाता है।
उत्सव को मनाने के दौरान भाग लेने के लिये इस दिन को मनाने से पहले कई तरीकों के द्वारा आमजनों, स्वास्थ्य संगठनों और दूसरे गैर-सरकारी संगठनों को बढ़ावा और निवेदन किया जाता है। आम नागरिक इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य होते है जिनके लिये ये संदेश फैलाया और बाँटा जाता है जिससे कैंसर को नियंत्रित किया जा सके। तदनुसार यूआईसीसी के द्वारा बेहतर सहायता के लिये एक उपकरण साजो-सामान जिसके पास साँचा, सूचना पत्रक, और निर्देश होता है, विभिन्न संगठनों के लिये उपलब्ध कराया जाता है।
लोगों के बीच इस कार्यक्रम को और परिणाम केन्द्रीत बनाने के लिये एक खास थीम के इस्तेमाल के द्वारा हर वर्ष इसे मनाया जाता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रति वर्ष विभिन्न प्रकार के कैंसर और मृत्यु दर के लिहाज से कलेजे के कैंसर/6,10,000, फेफड़ा के कैंसर/1.3 मिलीयन, कोलोरेक्टल के कैंसर/6,39,000, पेट का कैंसर/8,03,000, स्तन कैंसर/5,19,000 आदि के लोग (मध्यम और निम्न आय) शामिल हैं।
उत्सव को मनाने के दौरान, कैंसर होने के कारण के खतरों के बारे उनको बताने के लिये लोगों को लक्षित किया जाता है जैसे तंबाकू का इस्तेमाल, अत्यधिक वजन, कम सब्जी और फल खाना, कम या बिल्कुल भी शारीरिक क्रियाएँ नहीं करना, शराब का इस्तेमाल, एचपीवी संक्रमण, शहरी क्षेत्रों के वायु प्रदूषण, घर के अंदर धुम्रपान, अनुवांशिक खतरा, अत्यधिक धूप में रहना आदि। ह्यूमन पेपिलोमा वायरस और हेपेटाईटिस बी के अलावा टीकाकरण के तरीकों के बारे में भी लोगों को जागरुक किया जाता हैं।

कैंसर पर नियंत्रण पाना ज़रूरी

आंकड़ों के अनुसार, ये ध्यान देने योग्य है कि ज्यादातर कैंसर के मामले और मौतें (47% और 55% क्रमश:) विश्व के कम विकसित क्षेत्रों में सामने आए हैं। अगर ये नियंत्रित नहीं किया गया, तो 2030 तक ये और खतरनाक स्तर पर पहुंच सकती हैं। इसलिए ये बहुत ज़रूरी है कि इसे दुनिया के हर कोने में नियंत्रित किया जाए।

कैंसर की उपस्थिति के ख़तरे को घटाने के लिए अपनी अच्छी जीवनशैली, नियंत्रित आहार, नियमित वर्कआउट के बारे में इस कार्यक्रम के दौरान लोगों को अच्छे से बढ़ावा दिया जाता है। उन्हें अपने शराब की लत, अस्वास्थ्यकर आहार और शारीरिक स्थिरता से मुक्त कराने के लिए बढ़ावा दिया जाता है।


कैंसर के बारे में आम मिथक और तथ्य


आम लोगों के बीच में कैंसर के बारे में यहाँ नीचे कुछ आम मिथक और तथ्य दिये गये हैं जिसको हटाना बहुत जरुरी है तथा इसके ऊपर नियंत्रण पाने के लिये इसकी वास्तविकता को अच्छे से समझना होगा।
  • आमतौर पर लोग ये सोचते हैं कि कैंसर के ऊत्तक केवल स्वास्थ्य का मसला होता है जबकि ऐसा नहीं होता।
  • सामान्य लोग समझते हैं कि कैंसर धनवान और उम्रदराज़ लोगों की बीमारी है जबकि ये एक वैश्विक और संक्रामक रोग है जो सभी उम्र के लोगों को हो सकता है।
  • आमजन को लगता है कि कैंसर से पीड़ित होना मतलब ये एक सजा के समान है लेकिन अब ज्यादातर कैंसर उपचार योग्य है।
  • आम लोगों को लगता है कि कैंसर उनकी किस्मत में था जबकि 30% मामलों में इसे पूरे जीवन भर के लिये ठीक और रोका जा सकता है।

विश्व कैंसर दिवस थीम


विश्व कैंसर दिवस हर वर्ष कुछ विशेष थीम पर मनाया जाता है; कुछ वर्षों के थीम को यहाँ नीचे दिया जा रहा है:
  • 2007 के विश्व कैंसर दिवस का थीम था “बच्चों का आज, दुनिया का कल”।
  • 2008 के विश्व कैंसर दिवस का थीम था “बच्चों और युवाओं को एक धुआँ-मुक्त पर्यावरण दो”।
  • 2009 के विश्व कैंसर दिवस का थीम था “मैं अपने स्वस्थ सक्रिय बचपन से प्यार करता हूँ”।
  • 2010 के विश्व कैंसर दिवस का थीम था “कलेजे के कैंसर से संबंधित वायरस से रोकथाम के लिये टीकाकरण”।
  • 2011 के विश्व कैंसर दिवस का थीम था “ धूप से बचने के उपाय के द्वारा बच्चों और युवाओं को शिक्षा”।
  • 2012 के विश्व कैंसर दिवस का थीम था “एकसाथ ये मुमकिन है”।
  • 2013 के विश्व कैंसर दिवस का थीम था “कैंसर- क्या आप जानते थे ?”
  • 2014 के विश्व कैंसर दिवस का थीम था “मिथकों का भंडाफोड़ करना”।
  • 2015 के विश्व कैंसर दिवस का थीम था “हमारे सीमाओं के बाहर नहीं है”।
  • 2016, 2017 and 2018 के विश्व कैंसर दिवस का थीम था “हम कर सकते हैं। मै कर सकता हूँ।” वर्ष 2019 से लेकर 2021 तक तीन साल के लिए विश्व कैंसर दिवस का थीम “मैं हूं और मैं रहूंगा - (आई एम एंड आई विल)” रखा गया है।

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